🕯️ चन्द्रकोट का श्राप — भाग 1: अंधकार का दरवाज़ा
कहते हैं भारत की धरती ने असंख्य राज देखे हैं — राज, जिनसे छेड़ना इंसान को अपनी मौत बुलाने जैसा है।
चन्द्रकोट उन्हीं राजों में एक था।
उस रात का अंधेरा
👣 पहला कदम: मौत की सरहद
अर्जुन का मन दिन से ही बेचैन था। बचपन से उसने मंदिर की कहानियाँ सुनी थीं कहते थे, अगर कोई रात में उस मूर्ति के सामने सिर झुकाए बिना चले, तो उसकी साँस रुक जाती है।अर्जुन को लगा "ये सब अंधविश्वास है।"
“अगर ये सिर्फ कहानी है, तो रात को वहाँ जाने में डर क्यों लग रहा है?”
पर एक आवाज़ उसके भीतर से कह रही थी।
उस रात चन्द्रकोट में बादल घिरे थे, बिजली चमक रही थी। अर्जुन ने एक मशाल जलाई, और मंदिर की ओर कदम बढ़ाए। रास्ते में बकरियों की चीख सुनाई दी, जैसे कोई उनका खून पी गया हो। जंगल की हवा भी जैसे ज़हर घोल रही थी — हर पेड़, हर पत्ता अर्जुन को घूर रहा था। जब वह मंदिर के पास पहुँचा, तो उसकी साँस थम गई।दरवाज़ा… खुला था। किसी ने जैसे जानबूझकर उसका इंतज़ार किया हो।
भीतर का नरक
अर्जुन ने मशाल भीतर घुमाई — दीवारें खून के निशानों से सनी थीं। फर्श पर कई पुराने खोपड़ी के टुकड़े बिखरे थे, जैसे सैकड़ों साल से यहाँ बलि दी जा रही हो। मूर्ति सामने बैठी थी, उसका चेहरा अधजला, और आँखें…उन आँखों में एक सजीव नफरत थी, जैसे अभी वह मूर्ति अर्जुन पर कूद पड़ेगी।
अर्जुन का शरीर बर्फ हो गया। उसके कानों में किसी औरत की कराह सुनाई दी, जो मूर्ति के पीछे से आती लग रही थी — “मुझे बचा लो…” वह ठिठक गया। मंदिर में कोई और है? या ये उसी अभिशाप की आवाज़ है?
अगले भाग की झलक
अर्जुन का दिल ज़ोर से धड़क रहा था —चन्द्रकोट का श्राप Part- 2 क्या वह सचमुच किसी प्रेतात्मा की पकड़ में आ गया था? या ये सिर्फ उसकी आँखों का धोखा था? मगर जब मूर्ति के मुँह से खून की बूँदें टपकने लगीं, तो अर्जुन को समझ आ गया — ये जगह ज़िंदा है। और अब वो उसे जाने नहीं देगी।
👉 पढ़ते रहिए, अगले भाग 2 में अर्जुन का सामना होगा एक ऐसे तांत्रिक तंत्र से, जो इंसान की आत्मा तक को खा जाता है!







